हे मेरे स्वदेश!
रामधारी सिंह दिनकर
छिप जाऊँ कहाँ तुम्हें लेकर?… Read More
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अतीत के द्वार पर
रामधारी सिंह दिनकर
'जय हो’, खोलो अजिर-द्वार मेरे… Read More
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कलिंग-विजय
रामधारी सिंह दिनकर
युद्ध की इति हो गई;… Read More
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प्रतिकूल
रामधारी सिंह दिनकर
है बीत रहा विपरीत ग्रहों… Read More
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आग की भीख
रामधारी सिंह दिनकर
धुँधली हुईं दिशाएँ, छाने लगा… Read More
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साथी
रामधारी सिंह दिनकर
उसे भी देख, जो भीतर… Read More
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राही और बाँसुरी
रामधारी सिंह दिनकर
राही सूखी लकड़ी! क्यों पड़ी… Read More
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जयप्रकाश
रामधारी सिंह दिनकर
झंझा सोई, तूफान रुका, प्लावन… Read More
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जवानियाँ
रामधारी सिंह दिनकर
नये सुरों में शिंजिनी बजा… Read More
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कुरुक्षेत्र / तृतीय सर्ग / भाग 5
रामधारी सिंह दिनकर
भूल रहे हो धर्मराज तुम… Read More
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द्वन्द्वगीत – पृष्ठ – १२
रामधारी सिंह दिनकर
(१०१) चाँदनी बनाई, धूप रची,… Read More
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रुक्षेत्र / प्रथम सर्ग / भाग 1
रामधारी सिंह दिनकर
वह कौन रोता है वहाँ-… Read More
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कुरुक्षेत्र / प्रथम सर्ग / भाग 2
रामधारी सिंह दिनकर
और जब, तीव्र हर्ष-निनाद उठ… Read More
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कुरुक्षेत्र / द्वितीय सर्ग / भाग 1
रामधारी सिंह दिनकर
आयी हुई मृत्यु से कहा… Read More
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कुरुक्षेत्र / द्वितीय सर्ग / भाग 2
रामधारी सिंह दिनकर
"कृष्ण कहते हैं, युद्ध अनघ… Read More
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कुरुक्षेत्र / द्वितीय सर्ग / भाग 3
रामधारी सिंह दिनकर
और तब चुप हो रहे… Read More
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कुरुक्षेत्र / द्वितीय सर्ग / भाग 4
रामधारी सिंह दिनकर
किन्तु, मत समझो कि इस… Read More
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कुरुक्षेत्र / द्वितीय सर्ग / भाग 5
रामधारी सिंह दिनकर
जो अखिल कल्याणमय है व्यक्ति… Read More
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कुरुक्षेत्र / तृतीय सर्ग / भाग 1
रामधारी सिंह दिनकर
समर निंद्य है धर्मराज, पर,… Read More
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कुरुक्षेत्र / तृतीय सर्ग / भाग 2
रामधारी सिंह दिनकर
तुम विषण्ण हो समझ हुआ… Read More
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