Poem

अम्बर के गृह गान रे, घन-पाहुन आये।
इन्द्रधनुष मेचक-रुचि-हारी,
पीत वर्ण दामिनि-द्युति न्यारी,
प्रिय की छवि पहचान रे, नीलम घन छाये।
वृष्टि-विकल घन का गुरु गर्जन,
बूँद-बूँद में स्वप्न विसर्जन,
वारिद सुकवि समान रे, बरसे कल पाये।
तृण, तरु, लता, कुसुम पर सोई,
बजने लगी सजल सुधि कोई,
सुन-सुन आकुल प्राण रे, लोचन भर आये।

रामधारी सिंह दिनकर

Author Bio

रामधारी सिंह 'दिनकर' हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे। वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं। राष्ट्रवाद अथवा राष्ट्रीयता को

More

This post views is 25

Post Topics

Total Posts

403 Published Posts